का करबऽ मंत्री जी : चकाचक बनारसी
सबसे सुघर मोर गाँव रे..
कोकिल कीर मधुर सुर कूँजत कागा करै काँव-काँव रे ।
तँह विधुबदनी बइसि बतियावैं टेरि परसपर नाँव रे
सरगो के सखि ललचावै सलोना सबसे सुघर मोर गाँव रे ॥
अलिदल नलिनीं झुलावैं री आली निरखु तलइया ।
घनि बँसवरिया में पुरुबी बयरिया
रसे रसे बँसुरी बजावै री आली, निरखु तलइया ।
सर बर तरुनी नयन दुइ मछरी
कमल कै हथवा हिलावैं री आली, निरखु तलइया ।
मोजरल अमवा पियरि सरसोइया
फुलल परसवा बोलावै री आली, निरखु तलइया ।
अलिदल नलिनीं झुलावैं री आली निरखु तलइया ।
मोरी सहेलिया रे,
गउवैं खातिर छछनै मोर परान मोरी सहेलिया रे ।
खरी जिउतिया भुखैं मतरिया,
ननदो करैं ओसार अगोरिया – मोरी सहेलिया रे
पंडित भोरे भरैं भैरवीतान, मोरी सहेलिया रे -
गउवैं खातिर छछनै मोर परान मोरी सहेलिया रे ।
नाउन धोबिन धनि मलिहोरी,
पावैं पहुरा खोरिन खोरी – मोरी सहेलिया रे
स्वाती चितरा लहरैं गोइड़ै धान, मोरी सहेलिया रे -
गउवैं खातिर छछनै मोर परान मोरी सहेलिया रे ।
कतहूँ बरगद तर चौपाला,
कतहूँ बजै ढोल पर आल्हा - मोरी सहेलिया रे
कतहूँ बिरहा गावैं ग्वाला रेखभिनान, मोरी सहेलिया रे -
गउवैं खातिर छछनै मोर परान मोरी सहेलिया रे ।
जुग-जुग जीयै सखी मोर गउवाँ ।
कचरस सोन्ह करहवा कै खुरचन
लिटका लटीयै सखी मोर गउवाँ -
जुग-जुग जीयै सखी मोर गऊवाँ ।
बुढ़-ठेल तिरिया ओसरिया में ओठघल
लेवन सीयैं सखी मोर गउवाँ -
जुग-जुग जीयै सखी मोर गऊवाँ ।
गउवाँ इन्नर की रजधानी अखियाँ लखि ललचानी ना ।
दादुर मोर पपीहरा बोलै ओनवल घटा सुहानी ना
मड़इन लतर ललित अरुझानी, अखियाँ लखि ललचानी ना ।
सम्मय, बरम्ह, दइतरा, काली, भैरव की डिहवानी ना
माई सुघर मनौती मानी अखियाँ लखि ललचानी ना ।
ओक्का-बोक्का तीन तलौका, ’पंकिल’ गढ़ैं कहानी ना
सोहर गावैं धिया चुल्हानी, अँखिया लखि ललचानी ना ।
कमलवा गुलबवा कै बतिया..
दुइ सखि बिहँसि करैंलीं पनघटवा पै अपने कमलवा गुलबवा कै बतिया ।
एक लखि ललचै कमल फुल तलवा में, दूजी गुलबवा लगावैले छतिया ॥
पहली सखी -
मोरे पिछुअरिया सघन बँसवरिया तहवाँ कँवल-दह ताल
ताहि बिचे रँग-रँग खिलल कमल सखि कवनो धवल कवनो लाल ।
दखिन बयरिया से रसे रसे लहरैले हरियर हरियर लाल
लेहले पँखुरिया की नरमी अँगुरिया में सुरुजू के पुजवा कै थाल ॥
दूसरी सखी -
नियरे सटल मलहोरिया क बगिया तह सखि खिलल गुलाब
घुमरि घुमरि तँह बवरा भँवरवा गुन-गुन गावै ला बिहाग ।
जुड़ै रहैं मलिया क धियनी पुतनिया कै जुग-जुग अचल सोहाग
दस दिशि गम-गम गमकै गुलबवा से धरती कै सखि अहोभाग ॥
पहली सखि -
सखि सब मोर देवता कमल नयना ।
नीरज-नयनी पदुम गंदी गोरिया
सखि मनभावन के भरि अंकवारिया
आली रसे-रसे बोलै मधुर बयना ..
सखि सब मोर देवता कमल नयना ।
ना कंटवा भय ना पसीनवान सिंचाई
ललके कमल पर लसै लक्ष्मी माई
दुलरावैं सखि भँवरा सुगन मयना ..
सब मोर देवता कमल नयना ।
दूसरी सखि -
सखि गमला गुलबवा गज़ब गमकै ।
चोलवा गुलाबी कपोलवा गुलाबी
मनवा गुलाबी भवनवां गुलाबी
सखि नयना गुलाबी सी मद छलकै ..
सखि गमला गुलाबवा गज़ब गमकै ।
बासल गुलबवा से सँवरू कै पगिया
इतर गुलाबी घँसल मोरि अँगिया
सखि जोगियो कै मनवाँ निबुकि बहकै ..
सखि गमला गुलबवा गजब गमकै ।
पहली सखि -
चाकर-चाकर आली पुरइन पात रे ।
भावै भँवरवा के नलिनी कै कोरवा
कमल कै डरिया नरम धइले ठोरवा
हंसा गगनवाँ में उड़ि-उड़ि जात रे ..
चाकर-चाकर आली पुरइन पात रे ।
जलवै में जामै जलै में खोलै पँखिया
ओहि पाँकी पनियैं में मूदि लेला अँखिया
तबहूँ न ’पंकिल’ होखै ला गात रे ..
चाकर-चाकर आली पुरइन पात रे ।
दोनों सखियाँ -
आवा गाईं जा दूनों फुलवन कै गीत आली ।
कमलो कै गीत आली, गुलबो के गीत आली
दूनो फूलन ’पंकिल’ धरती कै मीत आली
आवा गाईं जा दूनों फुलवन कै गीत आली ।
धोबी-धोबिन क बतकही..(क्रियात्मक गीत)
कइसे बसंत मनाइब हो ..
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आली कंत न अइलैं तै कइसे बसंत मनाइब हो ॥
बैरिनि कुहुँकै कोइलिया कतेक समुझाइब हो
सखि बगिया निरखि रसवंती पगल होइ जाइब हो ॥
जाती की बेरियाँ कह्त गइलैं तोहै ना भुलाइब हो
रानी रखबै करेजवा की ओट पलकिया छिपाइब हो ॥
जनि रोआ अँखिया कै पुतरी तोहैं न बिसराइब हो
सखि चढ़तै फगुनवाँ कै मास बहुरि हम आइब हो ॥
हम नाहिं धनि निरमोहिया कि बिरहे जराइब हो
सखि सवने के मेघे तोहैं मघवा के जाड़ जुड़ाइब हो ॥
बहियाँ के पलना में झुर-झुर बेनियाँ डोलाइब हो
रानी तोरि निनिया सूतब जागब कल नहिं पाइब हो ॥
जय भारत बोला... दुसरका भाग
हिमकर हास दसन द्युति उडुगन,
मलयज बाजै सितार हो लहरिया क हार ले ले सगरा ।
सुर मणि मौलि मुकुट धवलागिरि
किंकिणि गंगा विहार हो लहरिया क हार ले ले सगरा ।
नरमद सिन्धु ललित अलकावलि
बिन्दी तिलक घनसार हो लहरिया क हार ले ले सगरा ।
द्राविण बंग तमिल अरु उत्कल
केरल चिरिया कै तार हो लहरिया क हार ले ले सगरा ।
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सखि अग जग मन चोरवा हो मोर भारत देशवा ।
गौतम गाँधी कै सजल सपनवाँ
राना, सिवा, लछिमीबाई क प्रनवाँ,
नख शिख सुभग पोर-पोरवा हो मोर भारत देशवा ।
भगत, अजाद, तिलक, चितरंजन
इनिरा, जवाहिर कै नयना क अंजन,
नाचै निरखि मन मोरवा हो, मोर भारत देशवा ।
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इन्नरपुर मदमथनी हमरी केसर कुंकुम नगरी
मोर कसमिरवा जागी ना ।
जननी माथै कै सिन्दुरवा, मोर कसमिरवा जागी ना ॥
कस्तूरी हिरनवाँ फनिहैं अम्बर ब्योम वितनवाँ
मोर कसमिरवा जागी ना ।
कवि गुरु कालीदास परनवाँ मोर कसमिरवा जागी ना ॥
जागी राजस्थनवाँ जागी कैकय सिन्धु सिवनवाँ
मोर कसमिरवा जागी ना ।
जागी सउँसै हिन्दुस्तनवाँ मोर कसमिरवा जागी ना ॥
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जय भारत बोला सुगन मयना ।
जय भारत बोला सुगन मयना ॥
इहवाँ बदे तरसै इन्नर की नगरी
सपनों में तजबै न इहवाँ की डगरी ,
अब ’पंकिल’ खोला अलस नयना -
जय भारत बोला सुगन मयना॥



